तुम दुरियां बरकरार रखो ..
तुम दुरियां बरकरार रखो अपनी तुम्हें नजदीकियों में इश्क समझ नहीं आता मैं तरस के, तड़पके मिलने चला हु तुझसे तुझे फिर भी मुझ पर रहम नहीं आता बेसक इन फासलों से मोहब्बत का नाप तोल कम नहीं होता मगर मैने जाया कर दिये अश्कों में कुछ तराने दिल के तुने पुछा भी नहीं,,और पोंछने भी नहीं आया तुम्हें अपने दर्द पहले दिखाई पड़ते हैं मैं सामने खामोशियो में सवाल रखता हु तुम्हें महपउज रख सकता हु तकलीफों से तेरा ख्याल रखता हु तु समझता मुझे तो पुछता क्या हुआ दफ्न कर दिया मैंने कुछ बातों को,तु मसले सुनने तक ना आया एक हमसफ़र कहने वाला,फिर भी भीड़ में मैं अकेला हो जाता हु कितनी बार गिर गया कितनी बार लड़खड़ा गया अफसोस तु उठाने तक ना आया AAchalsharma 🥀🥀
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