मैं
तुम्हें आसान लगता है मेरा मै होना पर चाहिए तो ले लो मेरा मैं मुझसे लेकिन मुझे लौटा दो मेरी बाईस तेईस वर्ष की वो उम्र जब सपने थे,ताकत थी,जुनून था हौसला था और खुला आसमान था शायद इतना कुछ होने पर भी तुम मुझसा नहीं बन सकते जानते हो क्यों क्योंकि मेरे जैसा बनने में खुद के सपनों को लूटाना होगा कुछ अजनबी मासूमों के पीछे खुद को दाव पर लगाना होगा करनी होगी किसी गैर की, अपने बच्चों सी चिंता इतना कर के भी एक गुमनाम जीवन बिताना होगा सह सकोगे,इतना कर के भी तुम्हे एक अजनबी महज कहलाना होगा अब बताओ आसान है क्या मेरा मै होना क्योंकि मैं सबका हूं,मेरा कोई नहीं सबके संवरता हूं,खुद बेरंग हूं बोला आसान है मेरा मैं होना राजीव
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