बेवफा से दिल्लगी....
अपनी मर्जी से गया था वापस आना चाहता है.... सारी दुनिया घूम कर अब मुझे पाना चाहता है.... हमारे इस रिश्ते में बस रंजिश ही बची है, कौन अब तेरे चेहरे पर हाथ उठाना चाहता है.......... अजनबी थे हम जब तलक ही जोश रहा था.... मैं तेरी गलतियों पर बोलकर खामोश रहा था.... तुझे तो बहुत लोग दिल लगाने को मिल गए, मैं अकेला कमरे में कई दिन तक बेहोश रहा था.......... तेरी यादों का सिलसिला नाकाम चल रहा है.... हमारा इस शहर में काफी नाम चल रहा है.... फिर दोबारा में खुद को हंसाया करता हूं, खुद की ही सीरत पर अब बस काम चल रहा है.......... तुम्हें यूं दिलों का कारोबार नहीं करना था.... अपनी इस जवानी को बेकार नहीं करना था.... मैंने शुरुआत में तुझे समझाया था लड़की, तुम्हें इस शेयर से कभी प्यार नहीं करना था.......... पूरा करके तुझे किए वादे को दूर मिलेंगे.... मेरे गम तब भी तुझको ही नासूर मिलेंगे.... मैं वादा तो नहीं करता पर बस ये कहूंगा, कभी खुदा ने चाहा तो हम जरूर मिलेंगे.......... क्या तूमनें कभी मुझको छुआ भी है.... ये लड़का आग था अब धुआ भी है.... तेरी ये एक सज़ा की कोई सज़ा नहीं बस तू हमेशा खुश रहे ये दुआ भी है.......... ~LEI🪶
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