एक हार और उससे मिली सीख"
एक हार और उससे मिली सीख" जिंदगी की अपरिहार्य ज़रूरत है ’हार’ चाहे इंसान कितनी भी सफलताएं करता है प्राप्त एक बहुत ही बड़ी सीख सिखला जाती है हार । क्या पाया ,क्या खोया ,कितनी बार ठोकरें खाकर तू गिरता ही गया ,हर जीत की खुशी का एक ही था समाहार , हर जीत में अंतर्निहित है , सपनों को पूरा होते देखने का अवसर अपार। इंसान की त्रुटियों और कमियों को जिसने फिर से दूर करना सिखलाया । नीरस और निराश कितने ही दिलों को पुनः जीवंत रहना बतलाया । बस वहीं ही कहलाता है मानव जीवन का आधार अभ्यास करके बारम्बार जो कार्य पूरा कर लेते है हर हार के बदले फिर से एक नवीन साज सा बुन लेते हैं तभी बनता है जीवन में निरंतर आगे बढ़ने का संचार । हर हार जीवन का नव निर्माण होती है एक छोटी सी चींटी भी मेहनत से गिरकर पुनः संभलना दर्शाती है । आगे बढ़ने के कोशिशें जारी रखिए हार को एक सहायक मीत बनाकर जीत को हासिल करने का लुत्फ उठाइए ।
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