आगाज
आगाज कर ऐ नारी आगाज कर तू अब ना डर अंजाम से आगाज कर कहने वाले यू ही कहेंगे नारियों का उत्थान करेंगे तू खुद जग औरों को भी जगा तू खुद अपना कल्याण कर ! ऐ नारी आगाज कर। रोके से जो ना रुके वो आबो हवा बन जा तू टूटे से जो ना टूटे वो चट्टान बन जा तू मुड़ने से जो ना मुरे वो जल धार बन जा तू ना रुक ना झुक अब उठ आवाज भर । ऐ नारी आगाज कर । पगतरई नहीं तू पांव की तेरा भी कुछ वजूद है जीवन के संघर्ष में हर क्षण मौजूद तू तू मोहिनी भी है तो नागन भी है तुझमें कोयल की कूक है तो सिंह की दहाड़ भी है दुनियां तो बदल चुकी अब तू भी बदल जा कंधे से कंधे मिला कर । ऐ नारी आगाज कर। बदइंतजामी कैसी ये तेरी गुलामी की जंजीरें पाव में तेरे पहनाने की तोर दे इन जंजीरी को हवा दे अपने सपनो को हौसले में उड़ान भर । ऐ नारी आगाज कर। मुद्दतो से मातहत हैं तू अब इन्हें शिकस्त दे तेरे मुखालिफ है कौन तू उन्हें ललकार लक्ष्मी झलकारी पदमिनी कल्पना नारी शक्ति की मिशाल है ये कर्म किया इन्होंने ऐसा आज v यादगार है ये बन इनकी तरह जिंदगी गुलज़ार कर। ऐ नारी आगाज कर। ना डर अंजाम से अब तू आगाज कर , ऐ नारी आगाज कर।
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