मां भारती के सपूत
उठो उठो वीर उठो , अंधकार चिर उठो मातृभूमि पीड़ा से हो रही अधीर उठो उठो बनो रौद्र प्रखर , कांप उठे तुंग शिखर दिशा दिशा सिहर सिहर, शत्रु गिरे बिखर बिखर । उठो बनो तेज ज्वार, करो वेद से प्रहार हो सदा अचूक वार, शत्रुका वो सिर उतार शक्तिपुंज बनो ज्वाल, बनो बनो महाकाल रक्त मै भरो उबाल, प्राप्त करो विजय भाल । उठो बनो गर्व उठो, रक्त का है पर्व उठो रक्त का गुलाल आज है रक्त का अबीर , उठो उठो सामने है चक्रव्यूह , तोड़ तोड़ कर बनो हिमशिखर की श्रृंखलाएं फान फान कर चढ़ो । शीला शीला पे शौर्य की नई कहानियां गढ़ों शत्रुके विनाश के लिए उठो चलो लढ़ो। उठो तुम्हारी शक्ति से ये सारे द्वंद नष्ट हो उठो तुम्हारी युक्ति से छलो के बंध नष्ट हो उठो पुकारता समर , उठो प्रचंड रूप धर उठो तुम्हे बुला रहा है भारती का नील उठो उठो वीर उठो, अंधकार चिर उठो।
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