उसको पाने की चाह में.. 🌸🥺
माना, तुम्हें पाने की चाह में मैंने ख़ुद को कई बार तोड़ा है। दुनिया की दौड़ में भागते हुए तुम्हारे सुकून को अक्सर छोड़ा है। मेरे एक हाथ में ताज का वादा है दूसरे में तुम्हारी उँगलियों की गरमाहट। डरता हूँ— कहीं पकड़ ढीली हुई तो तलवार जीत जाए, और छूट जाए चाहत। तुम सुकून हो, मान लिया मैंने पर सुकून को भी पूरा हक़ चाहिए। आधे दिल से थामे रिश्ते को हर रोज़ नया शक़ चाहिए। अगर तुम मंज़िल मेरे सफ़र की तो तुम्हें राह समझने की भूल न करूँ। वादा है दौड़ भी तुम्हारे नाम होगी और ठहराव भी तुम्हारे साथ चुनूँ।
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