मौत कहा आती.. 🌸🥺
मौत आती नहीं, और ज़िंदगी रोज़ मारती है। साँसें चल रही हैं, पर जीने की वजह कहीं खो गई है। अपनों से उम्मीद थी, वहीं सबसे ज़्यादा टूट गया। गैरों से क्या शिकायत करूँ, मैं तो अपने ही सवालों से हार गया। खुद को समझाते-समझाते अब खुद से भी बात नहीं होती। ना हँसी सच्ची लगती है, ना आँसू बहाने की ताक़त बची है। भीड़ के बीच खड़ा हूँ, फिर भी पूरी तरह अकेला हूँ। दिल चिल्लाता है अंदर ही अंदर, मगर सुनने वाला कोई नहीं। बस इतना जानता हूँ अब, कि दर्द आदत बन गया है, और मैं… खामोशी में ज़िंदा दफन हो गया हूँ ✍️✍️✍️
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