बारूद की चादर !
खून- खराबा से दुनिया को बचाया जाए, गगन में लगी है आग उसे बुझाया जाए । धुआँ-धुआँ हुआ है चारों तरफ से आसमां, उसे अब शान्ति का लिबास पहनाया जाए । इंसानियत खौफ़ खाई आज के लोगों से, मिसाइलों के पैरों में ताला झूलाया जाए । रूस,यूक्रेन,ताइवान नहीं फँसे समस्या में, उस तबाही से कायनात को बचाया जाए । युद्ध का दरवाजा मत खोलो दुनियावालों, मोहब्बत के गिरते ग्राफ को उठाया जाए । यतीम न बनें ये धरती और न ही बिलखे, स्वच्छ औ साफ चाँदनी से नहलाया जाए । उतार दो इसके बदन से बारूद की चादर, ऐसे सन्नाटों से विश्व को बचाया जाए । प्रथम-द्वितीय विश्व युद्ध से टूट चुका जग, सूने आसमां में फिर से गुल खिलाया जाए । जेवर के जैसे जो सजधज बैठे हैं एटम-बम, पानी के कफन से उन्हें दफनाया जाए । बो डालो फिर से नया दिल इस धरती में, चाँद के नर्म होंठों पे सुकूँ से सोया जाए ।
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