त्रिभन्गी छंद
दान करो, कल्याण करो सद्गुण अपनाओ, प्रभु गुण गाओ, दया दिखा कर,दान करो। दुखियों की सेवा, देती मेवा, निर्धन का सब, मान करो।। ईश्वर को भजकर, दानी बन कर, तुम सब अपना, नाम करो। बन सतपथ गामी, उसकी हामी, भरते रहकर, काम करो।। सबका रखवाला,ऊपर वाला, दिल में उनका, ध्यान धरो। प्रभु का सब फेरा,रंच न तेरा, उनके गुण का, गान करो।। बनना कल्याणी, हे नर प्राणी, ऊँच कर्म का,सुफल चखो। वह है दुखहर्ता,पालन कर्ता,मन में तनिक न, हिचक रखो।। 17.04.2025
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