अस्तित्व
सब मोह माया है भैया सब मोह माया है नश्वर संसार का नशा एक दिन उतर जाना है। ये फैशन ये रसायन लेपन सबका चमक उतर जाना है ये सुन्दर काया महंगा पहनावा सब मिट्टी में मिल जाना है । राग द्वेष लोभ मोह व अकड़ ये शानो शौकत छुट जाना है झूठा दिखावा और आपाधापी अचानक सब रुक जाना है। यश अपयश सब कीर्ति अर्जित सब यहीं की यहीं रहेगी संतति का तो अपना नया संसार लुटायेगी भोगेगी या नाश करेगी। अब साधु भी मत बनो सब छोड़ पलायन न करो बस केवल अपना दर्शन बदलो भौतिकता त्याज्य आध्यात्म रख लो। धर्म अर्थ काम मोक्ष पुरूषार्थ हैं केवल अर्थ और काम ही नहीं पर्याप्त है धर्म और मोक्ष का भी अभ्यास अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।
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