ले आई....
आज एक लड़की , मेरे खातिर खीर ले आई.... अपनी दोनों आंखों में , पेंनी शमशीर ले आई.... उसे निशाना मानकर , छोड़ा इश्क़ कमान से, टूटे-फूटे लगे जो उसको , सारे ही तीर ले आई.... कभी जो मुझसे पूछे वो , मैं कहूं मोहब्बत दौलत से, कुछ दो पल सोचा उसने और , सारी जागीर ले आई.... कहने पर ये की चले वहां , जहां तुम्हारा साया हो, सजदा करने मुझे वो लड़की , फिर अपने पीर ले आई.... हाथ बर्फ से ठंडे हैं , जिस्म भला क्यों जलता है, वो जन्नत से आते वक्त , झरनों की तासीर ले आई.... अपने चाहने वालों को वो , पागल समझा करती है, खुदा उसे कैसी जगह ये , उसकी तक़दीर ले आई.... उसके बाग़ीचे उजाड़ दिए , कुछ गुलबार से लोगों ने, शाम वो जिसके साथ थी बैठी , अपना नासिर ले आई.... ~Lakshay🌙
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