विधान
विधान ==================== संवीधान और विधान मे, बडा फर्क होता है, संवीधान माॅनीवल तो विधान, वीधीका, सच्चाई की ताकत पे चलता है. खेल किस्मत का भी क्या खुब होता है, जो चालाखी को बिरबल, तो अच्छे करमो को बादशा बणा देता है. वतन और घर परीवार हमारा है, ईससे गद्यारी न करो, कीसीका घर या देश उजाडा न करो. वीधीका विधान कीतना सही है, बचपन मे माॅंबाप बेटे को पालते है, और बदले....., बेटा जवानी मे पुरा परिवार. जो करोगे वही भरोगे, यही ब्रम्हांड मे बसी सुष्टी की देन है, मानतो ईश्वर है, ना मानोतो सब , यहा नश्वर है. क्या पाया क्या खोया सब ऊसकी माया है, समजतो ईश्वर.......! वरना वीधीका विधान तो सत्य ही सत्य है. ============================
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