उम्मीद
तू मेरी वो आशा है जिसमें, मैं खुद को तुझ में , तुझे खुद में देख लूं ।। मेरी ये आशा कोई निराशा का कारण नहीं, मेरा ये आश ही प्रेम है ।। माना कि है , संघर्ष बहुत माना कि है , अंधेर बहुत माना कि है, तू निराश बहुत तब किसी ने क्या खूब कहा है , यदि प्रेम अगर सच्चा तो प्रेम असफल होगा हर संकट का हल होगा ।। जब तुम ने ठान लिया , हाथ मेरा थाम लिया तो समझो तुमने जंग जीत लिया ।। क्योंकि ..... तुम मेरे लिए वो आशा हो......
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