"वो पिज्जा क्लब ''
बड़ी मुद्दतों बाद इक हंसी मुलाकात उनसे आज हुई , ' पिज्जा क्लब' में उस चुलबुली नटखट पगली से बात हुई, था मन हर्षित चेहरे पर शर्माहट की चादर लपेटे, उसकी जुल्फें जब ललाटों को चूमे तो हम बड़ी मुश्किल से खुद को समेटे, चिढ़ना चिढ़ाना उस नटखटी की अदाओं का कुछ यूं बयां हो जाना; वो तेरा ' पिज्जा क्लब' में मिलना ,तेरे सजदे में सर का झुकना, तेरा हाथ थामे मानो जिंदगी का सफर यूं ही बस कटना।। नूडल्स के हिस्से, वो पिज्ज़े की बाइट,वो कोल्ड कॉफी की चुस्की ,तेरा वो अचानक से प्यार जताना लगा आज मिल गया मुझको जैसे कोई बिछड़ा यार पुराना ।। तो कुछ ऐसा था अपने प्यार से मिलने का ठिकाना। थम गई सांसें उस एक पल में, जब हुआ हमारा घर को निकलने का पहर, आंखों में आसूं सांसों में नमी लिए बैठा मैं जब ऑटो में, दिल पकड़ के बहुत रोया मन ही मन।। .....मन ही मन।।
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