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राह गुजरते मुसाफ़िर से यूं दिल ना लगा सलीम बाद जुदाई के, नींदें हराम हो जाती है और ये जो हसीन वादियां है शहर-ए-मोहब्बत में मियां सब की सब वीरान हो जाती है
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