कहां हो तुम दोस्त ?
सामाजिक नातो का अद्भुत संसार, पर एक ही है दोस्ती का हकदार। डाल लो नजर पूरी दुनिया पार, वो एक ही जिसमें होगे गुण हजार। हां , वो है दोस्त, दोस्त, दोस्त कहाँ हो तुम दोस्त? मुझे जीवित रखने वाला, मुझे महकाने वाला, मेरा दोस्त है निराला। मै गाय वो मेरा ग्वाला। हां, वो है दोस्त, दोस्त, दोस्त कहाँ हो तुम दोस्त? पहचानना होगा उसे तुम्हें अपनेआप, क्योंकि उसी के नाम का करोगे तुम जाप। भगवान के जैसा,भगवान के समान है मेरा मित्र महान। हां,वो है दोस्त, दोस्त, दोस्त कहाँ हो तुम दोस्त? अब तो आ जाओ सामने, साथ ही मुझे पहचानने। बैठा हूँ , थमा हूँ तुम्हारे लिए, क्योंकि तुम ही हो मुझे सबसे प्रिय। हां, वो है दोस्त, दोस्त, दोस्त कहाँ हो तुम दोस्त? - वैभव छानना
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