शोर
शोर ======================== सुना है गली मे बहोत शोर है, हमारे आने से..., ये आनंद ऊत्स्तव है या, गम का माहोल, कुछ साफ नही नजर आता. करे तो क्या करे, समज से कोसो दुर है, महोल ......., कीसी की बेचैन आखे घुरती है हमे. कुछ बताने की कोसीस मे, लेकिन आजनबी सी, या डर के मारे ..... सिर्फ ताककरही आकना चाहती है हमे. कुछ तो गडबड है, कही शोर है हमारे कारण, तो काही शक. दिल बेचन है जनने के लिये, आखीर ये.... शोर और शक का कारण शोर और शक का कारण. ===================
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