"रुसवा"
अपनी ही चालाकियों से रुसवा कर लिया है मैने इसीलिए अब समझदार लोगों से बनती नहीं मेरी... ढूंढ के लाया हूं बड़ी शिद्दत से अपने बालपन को इसीलिए अब "बड़ों" से ठनती नहीं मेरी... मीठा रहा हूं धीरे धीरे अपनी ही हस्ती को इसीलिए अब तुम्हारी हस्ती से जमती नहीं मेरी...
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