ज़िंदगी
●●● गलतियां जब मिरी बताती है। ज़िंदगी नित रास्ता दिखाती है।। आईनों में भी चेहरे धुँधले हैं। असली चेहरा ये बस छुपाती है।। सोचता हूँ कि अब सुधर जाऊँ। हसरतें वस्ल राह से भटकाती है।। ख़ामोशी भी तब गुनाह लगती है। वो जब सज़ा बेवज़ह दिलाती है।। दोस्त दुश्मन में फ़र्क कमतर है। हर कशिश ज़ख्म दे के जाती है।। कैसे कह दें के भूल जाओ 'अयन'। तिशनगी रोज़ बढ़ती जाती है।। ●●● ©deovrat 'अयन' 18.05.2025
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