🫥🫥
क्या हक़ीक़त में कोई ऐसा होता हैं, जो हमें, हमसे भी ज्यादा समझता हैं,, हमारे हर डर और परेशानियों को, हमसे भी बेहतर जानता हैं,, न जाने वो कौन और कहा होगा, जिसे मेरी किस्मत में लिखा गया होगा,, वो जो मुझे, मुझसे भी बेहतर समझेगा, ढेरों खामियों में भी, मुझे वो चाहेगा,, यू थक गयी हु मै, मैं मुस्कुराते मुस्कुराते, झूठी हँसी में दर्द छिपाते छिपाते,,, कोई तो होगा, जो इस दर्द को जानेगा, ख़ामोशी के पीछे छिपी, आहत को पहचानेगा,,
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