बारिश की धुन।
मैं देवताओं द्वारा स्वर्ग से गिराए गए धागे हूँ, प्रकृति और घाटियों का श्रृंगार हूं, मैं शाम की ताज़ हूं। मेरे अश्रु से पहाड़ियां हंसती है, मेरे नम्र होने से फूल आनंदित होते हैं, मेरे झुकने से सारी चीजें प्रफुल्लित हो उठती है। मैदान और बादल रूपी प्रेमी के बीच, मैं दया का दूत हूं, एक की प्यास बुझाता हूं, तो दूसरी और एक के गम का साथी बन जाता हूं। गर्ज़न की आवाज मेरे आगमन की घोषणा करता है, इंद्रधनुष मेरे प्रस्थान की घोषणा करता है। मैं उस सांसारिक जीवन की तरह हूं, जो उत्तम तत्वों के चरण से शुरू होकर, मौत के उठे हुए पंखों के नीचे समाप्त हो जाता है। मैं अपनी कोमल उंगलियों से खिड़कियों को धीमे से स्पर्श करता हूं, मेरी घोषणा एक स्वागत गीत है, जिसे सभी सुन सकते हैं, लेकिन केवल संवेदनशील ही महसूस कर सकते हैं। मैं समुद्र और स्नेह के गहरे सागर की आहें हूँ, मैदान और आत्मा के रंगीन क्षेत्र की हंसी हूं, और यादों के अनंत स्वर्ग के आंसू हूँ। मैं बारिश हूँ।❤️🤌 - Shakshi Sharma
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