जीवन के हालात
शीर्षक :- जीवन के हालात जीवन के हालातों के आगे क्यों मजबूर से रहते हो । क्यों इतना तुम खुद से दूर रहते हो कभी तो गुफ्तगू करके समझाओ इस जीवन के पहलू को सारा दर्द इस नाजुक से दिल को क्यों तुम दिया करते हो । अपने इस दिल को ~ मनोज सोरेन ✍️✍️
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