बिखरे शेर की दहाड़
टूटे हुए सपने आंखों से लाल लहू बनकर बह रहे। उसी परस्तो की नदियों से उभर कर निकल रहा एक ऐसा तूफान जो एक झटके में हम डरे नहीं है तुम्हारे ताकत से और ना है जरूरत है तुम्हारी सुरक्षा की हम शांत है सिर्फ अमन के वास्ते। इस अत्याचारी शहर को इस तरह दफन करदे कि इसका नाम ओ निशान मिटा दे। इस शांति को मजबूरी नहीं हिम्मत समझो। जिस दिन एकता का यह बांध टूटा बाढ़ का प्रभाव विनाश काल तक रुकेगा नही।
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