विधाता छंद
शीर्षक-सफल जीवन करो ऐसा अलग हट कर, लगे जीवन उजाला है। सराहें लोग यह कह-कह, गजब का शौक पाला है।। थके तन-मन नहीं तेरा, सदा ही मौज मस्ती हो। सही रास्ता चलें हरदम,परम खुशियाँ न सस्ती हो।। धरा पर रिक्त ही आए, यहाँ से रिक्त है जाना । करो ऐसा यहाँ कुछ भी, कहे सब लोग फिर आना।। कुफल जीवन तभी समझो, मरो तब जश्न होता हो। सफल तेरा हुआ आना, समझ जब लोग रोता हो।। नरेन्द्र सिंह,11.04.2025
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