शराबियों की सोच
मैं शराब को मुंह नहीं लगाता, पर शराबियों से मेरा बैर नहीं; वो भी तो मेरे अपने ही हैं सभी, बस चाहता हूं, उनकी खैर ही। मैं शराबियों से मुंह नहीं लगाता, उनसे रहता हूँ, मैं काफी दूर ही; पर कुछ लिखकर समझाता हूं, ताकि कुछ तो सीखें वो सहूर ही। मेरी बातों का असर कहाँ उन पर, जानते हैं मेरा काम ही है लिखना ; बदस्तूर जारी रखते हैं पीना, सोचकर कि मरना ही है तो शरीफ क्यों दिखना। उनकी सोच भी जरा हटकर रहती है, कहते हैं,न पीने वाले भी तो मरते हैं; मरना ही है तो पीकर मरा जाय यार, पता नहीं "नरेंद्र"आखिर क्यों डरते हैं। नरेंद्र सिंह 03.01.2024
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