कितना अजीब
है न की एक मैं हुं, जो ख़ुद को न समझ पाया आज तक, एक दुनियां जो क्या क्या समझ गई मुझे.! 🖤
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
है न की एक मैं हुं, जो ख़ुद को न समझ पाया आज तक, एक दुनियां जो क्या क्या समझ गई मुझे.! 🖤
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets