किसी दु:खी आत्मा की हाय
किसी दु:खी आत्मा की हाय, और किसी का खाया हुआ हक, ज़िंदगी में तुम्हें कभी न कभी दुख ज़रूर देगा... वक़्त के पास सबका हिसाब है, यह चुपचाप देखता जरूर है, जो छीना है तूने मजबूर से, वो अश्क बनकर लौटेगा जरूर। लबों की दुआ और दिल की बद्दुआ, दोनों का असर होता है, जो तूने अनसुना किया आज, वो कल तेरे दर पे रोता है। इसलिए ज़रा थम के चल, ना कर किसी की रोटी पर हाथ, वरना जो सुख तूने चखा है, वो तुझसे रूठ जाएगा रातों-रात। – शब्दवेडा संतोष रामकिशन राऊत
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