गुमसुम
लोग कहते है मी अक्सर गुमसुम रहती हुं, न जाणे कोनसी दुनिया में खोई रहती हुं ! मन की बातें और दिल के नाते आसा कहा यहा? इसी पहेली को सुलझाने की कोशिश में रहती हुं ! काश कोई तो होता दुनिया में जो आँखें पढ सके , मेरे चेहरे की मासुमियत समझ के साजा कर सके ! चुभती है बातें गैरो की घाव अपनो के दिये दुखते है, नियत हमेशा साफ रही मेरी इसिलिये दर्द सेहते हैं! इस दुनिया में सबको खुश रखना आसान नही है, कोशिश ये भी करके देखीं है मैंने हमेशा हार मिलती हैं! दुसरो के मन का न हो अगर तो जुर्म तुम्हारा हैं! तुम्हारे सपनों की कदर यहाँ किसको कब पडी है ?? बेरुखी से पेश आएंगे हमेशा अपने क्युंकी उन्हे लागता है वो सही है, मेरी बात सुनता कोण है यहाँ पे ? इसिलिये मैंने खामोशी चुनी है ! समाजनेवाला कोई न हो अगर जिंदगी में तकलीफ जरूर होती है, बेहतरीन है में गुमसुम हुं क्युंकी बातों की किंमत चुकानी पडती हैं !!!
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