शिव की सांझ
अकाय प्रयाग में नमन शिव की सांझ को मैं बैठा ध्यान में, योगी – 2 अदृश्य ढूंढने तुम्हारी शाम को करत करत प्रतिकार में स्वर्ण समान अंधियार में शिव दिखे मुझे ओम के आकार में ||
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