महबूब का चेहरा ......
वो नूर उस चेहरे का जिसे चांद भी सलाम करे ठंडक उन होठों की जो आग को भी शांत कर दे हल्की भूरी आंखे , जो कुछ तो मुझसे कहना चाहे । उसकी वो कातिल अदाएं , क़यामत को भी दावत पर बुलाएं। जुल्फ़ों की काली घटाएं, मेरे मन को ऐसे लुभाए, जैसे जिस्म से रूह निकले , और चले तेरे संग हवाएं ।।
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