नारी
ये पृथ्वी नारी ये धरती नारी इस पर सजी प्रकृति भी नारी । वाणी में मधुरता स्वभाव कोमलता सतरंगी सुंदरता से धरती संवारी । है वो गौरी जो प्राण न्योछारी वो मीरा सी गई वारी वारी वही तो है जगदम्बा जगज्जननी हमारी । ये पृथ्वी नारी ये धरती नारी इस पर सजी प्रकृति भी नारी । है कितनी सुंदर नारी कोमल नारी सुशील नारी सहनशील नारी तुम उसका अपमान न करना है वो प्रचंड काली भी विनाशकारी । वो रानी पद्मिनी आत्मसम्मान की चिंगारी वो लक्ष्मीबाई सी क्रांतिकारी । ओर एक अविस्मृति सी न्यारी सबसे निश्छल मेरी माता प्यारी । ये पृथ्वी नारी ये धरती नारी इस पर सजी प्रकृति भी नारी। यहां तो भाषा भी नारी आशा भी नारी निराशा भी नारी जिज्ञासा भी नारी कण कण में नारी ये पृथ्वी नारी ये धरती नारी इस पर सजी प्रकृति भी नारी।।। ज्योति
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