किराए का मकान🏡
मजबूरियों की दीवारों में, अकेली मैं एक कोने में बैठी थी। तभी मन ने फुसफुसाकर कहा— कभी अपना घर भी उतना चैन नहीं देता, जितना किराए के मकान दे जाते हैं, जो क्षणभर को ही सही, पर अपने-से लग जाते हैं। कभी चाहत होती है बहुत कुछ करने की, पर इंतज़ार ही हाथ आता है। कभी सपनों की मंज़िल करीब होती है, फिर भी हार जीवन में साथ आता है। पर उम्मीद तो हर दिशा में बिखरी है, बस देखने का अंदाज़ ज़रूरी है। हार मान लेने से बेहतर है, दिल में विश्वास की लौ जलाना ज़रूरी है। आज मैंने सोचा, हार की चुप्पी से अच्छा है— उम्मीद की रोशनी को थाम लेना।
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