रिश्ते
3.रिश्ते कुछ रिश्ते सिर्फ कहने को होते हैं कुछ रिश्ते सिर्फ सहने को होते हैं कुछ रिश्ते मात्र दिखाने को होते है कुछ रिश्ते सिर्फ भुलाने के होते हैं कुछ रिश्ते तो निभाने के होते हैं कुछ रिश्ते तो सुनाने के होतें हैं कुछ रिश्ते तो सिर्फ नाम के होतें है अधिकांश रिश्ते बिना काम के होते हैं। निकट के भी रिश्तेदार गरीब हो तो ये रिश्ते बिल्कुल छिपाने के होते हैं। दूर के अमीर रिश्तेदार न हो तो भी वो रिश्ते टाँका भिड़ाने के होते हैं बार बार वैसे रिश्ते दुहराने को होते हैं ऐसे झूठे रिश्ते छाती फूलाने को होते हैं। नरेन्द्र सिंह 02.12.2023
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