मोम सी काया पीघल जायेगी !
में राजा, में रंक हूँ..! तू मेरी ज्योति, में तेरा दीपक हूँ..! ये मेरा है, ये भी मेरा है..! क्या तेरा, क्या मेरा है..? काया तेरी मोम सी, भभकती ज्वाला में पीघल जायेगी ..! साँसे तेरी पंखुड़ी सी, हवाएँ उड़ा ले जायेगी..! दिन-दिन अपना रोएगा..! क्षण भर गाँव पलक भिगोयेगा..! कुछ कमियाँ तो कुछ खूबियाँ पल भर में गा जायेंगे..! एक दिन अपने ही अपनों को जला जायेंगे..! जिस मिट्टी पे चलता है एक दिन उसी मिट्टी में मिल जायेगा..! क्या तेरा क्या मेरा सब धरा का धरा रह जायेगा...! रिश्ता खून का, रिश्ता मन का पल भर में टूट जायेगा..! ये जग-संसार क्षण भर में पीछे छूट जायेगा..! जिंदगी में हर पल हर कल नया सवेरा होगा..! किन्तु जिस दिन अंधेरा होगा फिर कभी न सवेरा होगा..! काया तेरी मोम सी,भभकती ज्वाला में पीघल जायेगी..! साँसे तेरी पंखुड़ी सी, हवाएँ उड़ा ले जायेगी..! - रावल
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