मैं हूं रक्षा लेखा विभाग
मैं हूं रक्षा लेखा विभाग औ औ मैं हूं रक्षा लेखा विभाग तीन शतक से अर्पित हूं मैं, भारत मां के चरणों में, हिमछोटी से सागर की सरहद में नापुं, भारत मां की सेवा में। मैं हूं रक्षा लेखा विभाग औ औ मैं हूं रक्षा लेखा विभाग (1) वित्त हितों का रक्षक मैं, उनका जो सरहद पर सीना तान खड़े हैं, वित्तीय सलाहकार बन संग हूं मैं, उनके जो हिंदसेना को सर्वोत्तम बनाने पर अड़े है। मैं हूं रक्षा लेखा विभाग औ औ मैं हूं रक्षा लेखा विभाग (2) ऑडिट ,अकाउंटिंग और पेमेंट मैं करता हिंद की सेनाओं को, धनचिंता से मुक्त मैं रखता, देश के वीर जवानों को। मैं हूं रक्षा लेखा विभाग औ औ मैं हूं रक्षा लेखा विभाग (3) नवाचार में ट्यूलिप ,डॉल्फिन और स्पर्श आपननाकर, मैंने अपने काज संवारे हैं, धन्य हुआ मैं उनकी सेवा कर, जो भारत मां के चरणों में अपना जीवन वारे है। मैं हूं रक्षा लेखा विभाग औ औ मैं हूं रक्षा लेखा विभाग (4) (कवि : श्री सत्यनारायण मीना, वरिष्ठ लेखा परीक्षक(Sr. Auditor) कार्यालय- प्रधान रक्षा लेखा नियंत्रक (सेना),जयपुर।)
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