शीर्षक :मौसम भेलइ दीवाना
अइलइ बसंत सुहाना हो, मौसम भेलइ दीवाना। नै जादे ठंडा,नै जादे गरमी सेहत ला हे भल ई नरमी। बयार के मिलल बहाना हो, ई अब तो बहे मनमाना। अइलइ बसंत सुहाना हो, मौसम भेलइ दीवाना।। इ रितु हे उतसो के दिनमा, उमंग ई लावे सबके मनमा। बुढ़वो भेलइ सयाना हो, गावइ फगुआ के गाना। अइलइ बसंत सुहाना हो, मौसम भेलइ दीवाना।। गेंहूआ सनकल,केरईया गदरल, सरसो फुलाल,बूट हे लथरल। जजात देखी किसनमा झुमइ, रोजे रोज जाके फ़सलवा चूमइ। एसो भरतइ कोठी खजाना हो, खटे के मिलतइ मेहताना। अइलइ बसंत सुहाना हो। मौसम भेलइ दीवाना।। अममा में लगलइ मंजरवा, खिलइ फुलवा गेंदा हज़रवा। कोपल लगलइ पेड़ टहनियाँ, भीनी भीनी महकइ बगनियाँ। कोइली कुंहके मीठी बोलिया, बिरहीन के लगे मानो गोलिया। कमाई गेलइ जेकर मरदाना हो, काटे दौड़इ बसंती गाना। अइलइ बसंत सुहाना हो। मौसम भेलइ दीवाना।। नरेंद्र सिंह,अतरी गया 06.02.2025
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