" मिट्टी के दीप सजाओ "
चाहता हूंँ सबके घर दीप जले, पर मेरे घर भी दीप जलाओ। इस मिट्टी के दीप बने जो, तुम अपने घर में सजाओ।। कितनी मेहनत से हमने, मिट्टी रौंदा चाक घुमाया। तपती धूप जली अंगारा, तन-मन हमने झुलसाया।। दीपक के न मोल लगाओ, पर मेरे घर भी दीप जलाओ। ममता भरी कहानी कहती, बेटी तुम मिट्टी के दीप बनाओ।। कुबेर घरों में सजेंगे लड़ियां, चका-चौंध की है दुनिया। इस मिट्टी के मोल हैं क्या, कहती है ये सारी दुनिया।। इसकी शुद्धता जो जाने, रोग रहित परिवेश हो मानें। आर्यावर्त संस्कृति दिखे, इस मिट्टी के दीप से मानें।। धर्म परंपरा में दिखे विज्ञान, दीपोत्सव में छुपे ज्ञान से। कहे कवि "राधे" मनसे, मिट्टी के दीप जलाओ मनसे।। चाहता हूंँ सबके घर दीप जले, पर मेरे घर भी दीप जलाओ। इस मिट्टी के दीप बने जो, तुम अपने घर में सजाओ।। #दिपावली #दिवाली #मेरी-दिवाली
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