ख़्वाइश
है पाकीज़गी रूह में तेरी, तो भला देखकर पाक हर बशर कैसे न हो देखना तुझे , एक मिन्नत सा है मगर!!! पड़े जो कतरा एक नज़र का तेरे गर , खुशनसीब वो भला कैसे न हो
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