माँ
बहुत पहले का नाता है यह, इसलिए ख़ुदा ने माँ बेटी के रिश्ते मैं बांदा है हमें ... अपनी ख्वाहिशों को दबा कर पाला है मुझे, जिंदगी वक़्त का खेल है और इसे खेलना सिखाया है मुझे। बात मेरी आए तो दुनिया से भी झगड़ जाती है, और खुद के बनाए उसूलों को भी हस्ते- हस्ते तोड़ जाती है । उनकी जैसी कहा बन पाऊँगी मैं, पर बेटियों को दोस्त कैसे बनाया जाता है सीखाया है मुझे । बहुत पहले का नाता है यह, इसलिए ख़ुदा ने माँ बेटी के रिश्ते मैं बांदा है हमें । -Nishtha
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