ये कैसी नाराजगी!!
उन्हें लगता है कि हम नाराज़ हैं उनसे नाराजगी तो नहीं हां कुछ गिले हैं उनसे कैसे कहें हमने उनका इंतेज़ार किया घंटों समय की धारा ऐसे चली जैसे बीत गए हों वर्षों, बस कुछ गिले शिकवे हैं उनसे इक हक से मांगा था समय हमने उनसे हम समझ नहीं पाए उनकी भी अपनी व्यथा है है बनाने उनको कइयों के भविष्य जिम्मेदारियों की भी उनकी अपनी कथा है फिर भी नई नई है हमारी दोस्ती हो जाती है नादानी में हमसे भी गलती फिर भी लगता हैं कि हम नाराज़ हैं उनसे तो लो हम ' सर ' झुका के हैं कहते नाराज़ नहीं हैं हम उनसे डरते हैं बस कुछ कहीं कोई रूठ न जाए हमसे।।
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