अंजान सफर
डर के लहर पर बहती तीन नादान पारियां गिर संभालकर खुद ही भटकती रही पथरीले रास्ते पर। ना अंजाम का पता, ना मंजिल की कबर, तलाश है तो बस उस मुकाम का जहां सुकून नदिया के तट पर बैठ दिल भरोसे की सास भर पाए।
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