२६/०९/२०२४
वो हाथ कभी छू ही नही पाए तुम्हे, जिन हाथों से मैने सब लिखा तुम्हे। जिन हाथों में तुम्हारा हाथ चाहा, आज उनमें कलम रखी है। जिनसे तुम्हारी जुल्फें संवारनी चाही, जिन्हें तुम्हारे गालों पे रख कर एहसास जताना चाहा, आज वो सूने हैं, तुम्हे पाने को बेकरार खाली से, तुम्हारे एहसास का इंतजार करते थकते नहीं, तुम्हारी बांहों में आने को तरसते हैं, पर कुछ कहते नही, कुछ करते नहीं, कह नही पाते इसलिए लिखते हैं। ये जिद पकड़े बैठे हैं, लिखने को कलम लिए बैठे हैं। ये छू नहीं पाते तुम्हे इसलिए, तुम्हे छूने का एहसास लिखते हैं।।
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