फूल खा गई लड़की
वो फूल सी दिखने वाली फूल खा गई लड़की जलवा बिखेर अदाओं का मेरे दिल पे छा गई लड़की उसे ख़ुद की तारीफ़ ज्यादा नहीं पसंद मगर मैं खुद को कैसे रोकूं मेरी आंखों में बस कर वो मेरे मन को भा गई लड़की यूं तो उससे फासला हजारों मीलों का है फिर भी इतनी मोहब्बत है जब जब उसे याद किया मेरे सामने आ गई लड़की मेरी सब नज़्में ग़ज़लें उसके आगे बे असर सी है एक हल्की सी मुस्कुराहट के साथ गीत मोहब्बत का गा गई लड़की उसकी आँखें, उसका चेहरा और खुली हुई जुल्फें हुस्न की इबारत हैं इन सबको पीछे छोड़ अपनी सादगी से कहर ढा गई लड़की वो फूल सी दिखने वाली फूल खा गई लड़की
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
