प्यारी चिड़िया
क्या बात होती मैं अगर एक चिड़िया होती अपने पर इतराती मैं, मस्त हवा में लहराती अपने परों की रंगीनी से, दुनिया में रंग बिखराती मैं बुनती एक ख्वाबों का संसार ,जिसमें होते रंग हजार इस सुंदर से नील गगन में, अपना हक जमाती मैं क्षितिज से अनंत तक जाने की होड़ लगाती मैं अपनी छोटी सी आंख से, देखती सपने बड़े-बड़े इक इक तिनका जोड़कर, अपना महल बनाती मैं अपने सुरीले कंठ से प्रेम का पाठ पढ़ती मैं स्वयं को स्वयं से मिलवाती मै, निराशा को दूर भगाती अपनी लंबी चोंच से, जीवन में फैले अंधेरे को मिटाती अपने संघर्ष से रच दो इतिहास ऐसा दृढ़ निश्चय बंधाती मैं कितना स्वतंत्र जीवन है इनका, बंधन रहित स्वच्छंदता से पूर्ण परमात्मा की सुंदर चित्रकारी समाज की बुराइयों से है कोसों दूर क्या बात होती मैं अगर एक चिड़िया होती अपने पर इतराती मैं मस्त हवा में लहराती
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