पलायन
आज मैने फिर एक बेटा को रोते हुए देखा अपने परिवार से विछड़ते देखा उनके सर पर उम्मीदों का एक भार देखा उनका शिफ्ट (अलग) होते हुए संसार देखा कही दुर बेगानो कि नगरी मे धक्का खाते हुए लाचार देखा उनकी माँ कि सिसकती आखो से अपने बेटे को ओझल होते देखा दादा जी कि आहो मे खुद को फिर से मरते देखा काश देखते नेताओ को अपनो से जुदा होते हुए उनके अपनो से बिछड़ने के गम का घुट पीते हुए
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