शहर
पटना की सड़कों पर, कहां मज़ा रह जाता है ... बाज़ार, मॉल, थिएटर, कैफे, सारा शहर सूना सा हो जाता है । तुम्हारे होने से ही गुलज़ार रहता है शहर मेरा , तुम न रहो तो अपना ही शहर सज़ा हो जाता है।।
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