मैं कवि हूँ!
समाज की हर एक बात लिखता हूँ, मैं कवि हूँ, जज्बात लिखता हूँ। गम चाहे कैसे भी हो, गमों में खुशी की सौगात लिखता हूं। समय आने पर कई लोग बदल जाते हैं, गजलों में उनकी औकात लिखता हूं। हर एक लम्हों को खुल के जीता हूं , मैं वही हर एक मुलाकात लिखता हूं। दिलों में अरमानों की बहार है, पन्नो पर दिलों के हालात लिखता हूँ। दुनिया इंसान की कामयाबी देखती है, मैं कामयाबी के पीछे का आगाज लिखता हूँ। सब कुछ नहीं जानता, वाकिफों की बस्ती में , फिर भी मैं सारी कायनात लिखता हूं। जिंदगी एक-सी नहीं होती है सबकी, उन सबका मैं हयात लिखता हैं। दुनिया से इन्सानियत खत्म हो रही है, मैं उस इन्सानियत का ईजाद लिखता हूँ। खुदा की रहनुमा हर जगह शामिल है, मैं दसरिया हूं, रब का फरमान लिखता हूँ। . @vip_dasariyadr
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