मैं कौन हूँ
मैं कौन हूँ? कभी ठहरा हुआ सा दरिया, कभी बेचैन सी एक लहर हूँ। कभी गुमसुम सी रात का साया, कभी खिलखिलाती सी सहर हूँ। मैं कौन हूँ? इन दौड़ते चेहरों की भीड़ में, एक अनजाना सा नाम हूँ। कभी अपनी ही धुन में मगन, कभी दुनिया से हैरान हूँ। मैं कौन हूँ? ख्वाहिशों के आसमान में उड़ता, एक आज़ाद परिंदा हूँ। ज़िम्मेदारियों की ज़मीन पर, एक छोटा सा बाशिंदा हूँ। मैं कौन हूँ? कभी तेरे लबों की हँसी, कभी किसी की आँख का पानी हूँ। कभी खत्म न होने वाली खोज, एक अनकही सी कहानी हूँ। मैं कौन हूँ? मिट्टी का एक पुतला हूँ या, रूह की कोई पहेली हूँ। इस कायनात के आँगन में, एक छोटी सी अंजुली हूँ। मैं कौन हूँ? कभी खुद में ही सब कुछ पा लूँ, कभी खुद से ही अंजान हूँ। बस यही सवाल है दिल में हरदम, आखिर क्या मेरी पहचान है? मैं कौन हूँ? " पिनाकिन "
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