शायर
कुछ लफ्ज़ो को कलम से तरसना है है अभी शयर नहीं बना है अभी आशिक-ऐ शयर बना है मोहब्बत खुदा बनकर मिली मुझे अभी तो उसके रुसने मानाने का भी इंतजार करना है है अभी शयर नहीं बना है अभी आशिक-ऐ शयर बना है
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